Tue. Apr 21st, 2026
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    जय माता जी।

    “नवरात्रि में नवदुर्गा स्तुति”

    सबके मन में
    खुशियां अपार ,
    आया दुर्गा पूजा का त्योहार
    भक्त हैं पूरी तरह से तैयार
    यह पर्व है बड़ा ही मजेदार !
    मां ने किया था
    महिषासुर का संहार
    इसी उपलक्ष्य में
    मनाया जाता है त्योहार ।
    दर्शन के लिए रहती
    भक्तों की भरमार ,
    जब -जब धरती पर
    हुआ अत्याचार ।
    दुष्टों ने ख़ूब मचाया हाहाकार ,
    तब मां ने किया
    दुष्टों का संहार ।
    आया दुर्गा पूजा का त्योहार
    सभीको यह त्योहार
    है भाता ,
    गरबा घूमने में ख़ूब
    है आनंद आता ।
    बुराई पर अच्छाई का
    संदेश है लाता ।
    इस पर्व का सबको है
    रहता इंतज़ार ,
    आया दुर्गा पूजा
    का त्योहार।
    नवरात्री में नवदुर्गा
    नव नव रूप धरे ।
    हर रूप की अपनी महिमा
    कुछ शब्द न कह पाएं
    शैलपुत्री तुम प्रथम कहलाती ।
    हिमराज की सुता कहलाती
    द्वित्य ब्रह्मचारिणी हो तुम
    दुखियों की दुखहारिणी हो तुम ।
    चंद्र घटना तृतीय रूप है तेरा
    दुष्ट प्रकम्पित होते सारा ।
    कुश्मांड़ा तेरा रूप चतुर्थकम
    उल्लास का देती नया सोपान।
    पंचम स्कन्द माता कहलाती
    कार्तिकेय के संग पूजी जाती ।
    षष्टम कात्यायनी हो तुम
    कात्यान ऋषि की सुता हो तुम ।
    कालरात्रि तेरा सप्तम रूप है
    दुष्टो का बेडा गर्क है ।
    अष्टम में तुम महा गौरी
    कुंदन सुमन सी कोमल नारी
    नवम सिद्धि दात्री हो तुम
    सुख समृद्धि और मोक्ष की माता हो तुम।

    -डो दक्षा जोशी
    अहमदाबाद
    गुजरात।

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