जय माता जी।
“नवरात्रि में नवदुर्गा स्तुति”
सबके मन में
खुशियां अपार ,
आया दुर्गा पूजा का त्योहार
भक्त हैं पूरी तरह से तैयार
यह पर्व है बड़ा ही मजेदार !
मां ने किया था
महिषासुर का संहार
इसी उपलक्ष्य में
मनाया जाता है त्योहार ।
दर्शन के लिए रहती
भक्तों की भरमार ,
जब -जब धरती पर
हुआ अत्याचार ।
दुष्टों ने ख़ूब मचाया हाहाकार ,
तब मां ने किया
दुष्टों का संहार ।
आया दुर्गा पूजा का त्योहार
सभीको यह त्योहार
है भाता ,
गरबा घूमने में ख़ूब
है आनंद आता ।
बुराई पर अच्छाई का
संदेश है लाता ।
इस पर्व का सबको है
रहता इंतज़ार ,
आया दुर्गा पूजा
का त्योहार।
नवरात्री में नवदुर्गा
नव नव रूप धरे ।
हर रूप की अपनी महिमा
कुछ शब्द न कह पाएं
शैलपुत्री तुम प्रथम कहलाती ।
हिमराज की सुता कहलाती
द्वित्य ब्रह्मचारिणी हो तुम
दुखियों की दुखहारिणी हो तुम ।
चंद्र घटना तृतीय रूप है तेरा
दुष्ट प्रकम्पित होते सारा ।
कुश्मांड़ा तेरा रूप चतुर्थकम
उल्लास का देती नया सोपान।
पंचम स्कन्द माता कहलाती
कार्तिकेय के संग पूजी जाती ।
षष्टम कात्यायनी हो तुम
कात्यान ऋषि की सुता हो तुम ।
कालरात्रि तेरा सप्तम रूप है
दुष्टो का बेडा गर्क है ।
अष्टम में तुम महा गौरी
कुंदन सुमन सी कोमल नारी
नवम सिद्धि दात्री हो तुम
सुख समृद्धि और मोक्ष की माता हो तुम।
-डो दक्षा जोशी
अहमदाबाद
गुजरात।
